जयपुर का इतिहास
जयपुर, जिसे "गुलाबी नगरी" (Pink City) के नाम से भी जाना जाता है, भारत के राजस्थान राज्य की राजधानी है। यह शहर अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, राजपूताना शान और वास्तुकला के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
स्थापना
जयपुर की स्थापना महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने 18 नवंबर 1727 को की थी। सवाई जय सिंह आमेर राज्य के शासक थे, लेकिन आमेर की भौगोलिक सीमाएँ और जल संकट बढ़ते हुए जनसंख्या के कारण शहर को स्थानांतरित करने की आवश्यकता पड़ी। इसके बाद उन्होंने एक नई राजधानी बसाने का निर्णय लिया।
नियोजित शहर
जयपुर भारत का पहला सुव्यवस्थित और योजनाबद्ध शहर था। इसका निर्माण वास्तुविद विद्याधर भट्टाचार्य द्वारा प्राचीन वास्तुशास्त्र और शिल्पशास्त्र के सिद्धांतों के आधार पर किया गया। शहर को नौ खंडों में बाँटा गया, जिनमें से दो खंड प्रशासनिक भवनों के लिए और सात खंड जनता के लिए बनाए गए।
गुलाबी रंग का रहस्य
1876 में जब प्रिंस ऑफ वेल्स (बाद में किंग एडवर्ड VII) जयपुर आए, तो महाराजा राम सिंह ने शहर की सभी इमारतों को गुलाबी रंग से रंगवा दिया, जो आतिथ्य और स्वागत का प्रतीक माना जाता था। तब से जयपुर को "गुलाबी नगरी" कहा जाने लगा।
ब्रिटिश राज और स्वतंत्रता के बाद
ब्रिटिश शासन के दौरान जयपुर एक प्रमुख रियासत बना रहा। 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद, जयपुर ने भारतीय संघ में शामिल होने का निर्णय लिया। 1949 में जयपुर राजस्थान राज्य की राजधानी घोषित हुआ।
जयपुर की प्रमुख ऐतिहासिक धरोहरें:
आमेर किला
हवा महल
जल महल
जंतर मंतर (UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज साइट)
सिटी पैलेस
नाहरगढ़ किला
जयगढ़ किला
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